उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shab KHumar-e-husn-e-saqi hairat-e-mai-KHana tha

शब ख़ुमार‌‌‌‌-ए-हुस्न-ए-साक़ी हैरत-ए-मयख़ाना था

شب خمار‌‌ حسن ساقی حیرت میخانہ تھا

शायर: Ehsan Danish Kandhlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शब ख़ुमार‌‌‌‌-ए-हुस्न-ए-साक़ी हैरत-ए-मयख़ाना था
आप ही मय आप ही ख़ुम आप ही पैमाना था

का'बा-ओ-दैर कलीसा में 'अबस ढूँडा किए
दिल का हर गोशा मक़ाम-ए-जल्वा-ए-जानाना था

रंग लाया है बरा-ए-दीदा-ए-अंजाम जो
शम' हर हर ज़र्रा-ए-ख़ाक-ए-पर-ए-परवाना था

ख़ामी-ए-ज़ौक़-ए-नज़र थी वर्ना ऐ नाकाम-ए-'इश्क़
ज़र्रे ज़र्रे से नुमायाँ जल्वा-ए-जानाना था

फिर वही सौत-ए-तरब-अफ़ज़ा बने फ़िरदौस-ए-गोश
जिस से इक 'आलम शहीद-ए-नग़्मा-ए-मस्ताना था

दीद के क़ाबिल तमाशा था ये हंगाम-ए-सहर
शम' का हर साँस महव-ए-मातम-ए-परवाना था

फ़ित्ना-ए-मज़हब भी ख़ुद-बीनी का इक अंदाज़ है
वर्ना किस को इम्तियाज़-ए-मस्जिद-ओ-बुत-ख़ाना था