उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agar mohabbat ke muddai ho to ye rawayya rawa nahin hai

अगर मोहब्बत के मुद्दई' हो तो ये रवय्या रवा नहीं है

اگر محبت کے مدعی ہو تو یہ رویہ روا نہیں ہے

शायर: Ehsan Danish Kandhlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगर मोहब्बत के मुद्दई' हो तो ये रवय्या रवा नहीं है
जो शिकवा है रू-ब-रू नहीं है जो बात है बरमला नहीं है

ये रोज़-ए-तजदीद-ए-अहद-ए-उलफ़त ये रोज़ पैमान-ए-दिल-नवाज़ी
हज़ार तस्लीम कर रहा हूँ मगर यक़ीन-ए-वफ़ा नहीं है

है तेरे काफ़िर-शबाब से ख़ूब मेरी मा'सूम मय-गुसारी
सुरूर की एक हद है क़ाएम ग़ुरूर की इंतिहा नहीं है

अजब नहीं ज़हमत-ए-वफ़ा से मुझे किसी दिन नजात दे दे
यही मिरी बे-ज़बाँ मोहब्बत जो दर-ख़ुर-ए-ए'तिना नहीं है

न जाने किस किस से दिल लगा कर वफ़ा से मायूस हो चुका हूँ
नज़र परेशान-ए-शश-जिहत है कोई भी दर्द-आश्ना नहीं है

जता के मजबूरी-ए-मोहब्बत उमीद-ए-मेहर-ओ-वफ़ा के मा'नी
मैं ख़ुद हूँ अपना सुकून-ए-दुश्मन किसी की कोई ख़ता नहीं है

बजा बजा बे-शुमार आरिज़ नज़र नज़र को तरस रहे हैं
मगर ये दिल का मोआ'मला है निगाह का वास्ता नहीं है