उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab kaho karwan kidhar ko chale

अब कहो कारवाँ किधर को चले

اب کہو کارواں کدھر کو چلے

शायर: Ehsan Danish Kandhlvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब कहो कारवाँ किधर को चले
रास्ते खो गए चराग़ जले

आँसुओं में नहा गईं ख़ुशियाँ
रूठ कर जब वो आ लगे हैं गले

इश्क़ ग़म को उबूर कर न सका
रास्ते कारवाँ के साथ चले

हम पे गुज़री हैं हिज्र की रातें
हम जहन्नम में थे मगर न जले

थे मोहब्बत की इब्तिदा के क़ुसूर
वो तबस्सुम जो आँसुओं में ढले

ख़ाक से सैंकड़ों उगे ख़ुर्शीद
है अंधेरा मगर चराग़-तले

चाँद साकित है रुक गए तारे
अब वो आएँ तो ग़म की रात ढले

मय-कदे का तो ज़िक्र भी है गुनाह
अब हयात-ए-हरम पड़ी है गले

पुर्सिश-ए-हाल का जवाब था क्या
हँस पड़े हम कि जल्द बात टले