उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shair hue to kya hue ehsan hi rahe

शाइ'र हुए तो क्या हुए 'एहसान' ही रहे

شاعر ہوئے تو کیا ہوئے احسانؔ ہی رہے

शायर: Ehsan Darbhangavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाइ'र हुए तो क्या हुए 'एहसान' ही रहे
'मिर्ज़ा'-ओ-'मीर' बन न सके ख़ान ही रहे

इम्काँ के दाएरे को जो वुसअ'त न दे सके
अपने हुदूद-ए-ज़ात का इरफ़ान ही रहे

जब दिल हो मुज़्तरिब तो कहाँ तक ख़ुदी की लाज
ऐ नाज़-ए-हुस्न आज तिरी आन ही रहे

आहट किसी के पाँव की आई न सुब्ह तक
हम दिल की धड़कनों के निगहबान ही रहे

पहुँचा न दस्त-ए-शौक़ जो दामान-ए-यार तक
बे-शग़ल क्यों हो अपना गरेबान ही रहे

है इल्तिजा-ए-शौक़ में भी तनतना वही
'एहसान' इश्क़ करके भी 'एहसान' ही रहे