उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sataish se hote nahin shadman

सताइश से होते नहीं शादमाँ

ستائش سے ہوتے نہیں شادماں

शायर: Om Prakash Laghar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सताइश से होते नहीं शादमाँ
मलामत से हम तिलमिलाते नहीं

हो ख़ौफ़-ए-ख़ुदा जिन के दिल में बसा
वो हरगिज़ किसी को सताते नहीं

गुनाहों से दामन बचाते हैं हम
इबादत में गो सर झुकाते नहीं

न हम रहनुमा हैं न हम राहबर
ग़लत राह लेकिन बताते नहीं

इबादत से पाते हैं हम वो सुरूर
जो मीना-ओ-साग़र से पाते नहीं

है आँखों से पीने की ख़्वाहिश हमें
मगर वो नज़र तक मिलाते नहीं

मोहब्बत में हम खाए बैठे हैं मात
मगर अश्क 'लाग़र' बहाते नहीं