उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar tere aastan pe jhukae hue hai hum

सर तेरे आस्ताँ पे झुकाए हुए है हम

سر تیرے آستاں پہ جھکائے ہوئے ہے ہم

शायर: Yadgar Husain Nashtar Khairabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर तेरे आस्ताँ पे झुकाए हुए है हम
या'नी फ़राज़ अर्श पे छाए हुए है हम

हासिल हमें है लुत्फ़-ए-बहार-ए-जमाल-ए-दोस्त
मय-ख़ाना आज सर पे उठाए हुए है हम

गुम-कर्दा राह-ए-का'बा-ओ-बुत-ख़ाना से अब दूर
इन मंज़िलों की ख़ाक उड़ाए हुए हैं हम

आ शैख़ मय-कदे में तेरी आक़िबत ब-ख़ैर
रहमत को बोतलों में छुपाए हुए हैं हम

'नश्तर' तसव्वुर-ए-रुख़-ए-ताबाँ है रात-दिन
ग़म को बहुत हसीन बनाए हुए हैं हम