उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chand ka nur sitaron ki ziya ban jaun

चाँद का नूर सितारों की ज़िया बन जाऊँ

چاند کا نور ستاروں کی ضیا بن جاؤں

शायर: Yadgar Husain Nashtar Khairabadi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँद का नूर सितारों की ज़िया बन जाऊँ
सोचता हूँ कि तिरी बज़्म में क्या बन जाऊँ

साज़-ए-दिल-सोज़ की दिल-गीर सदा बन जाऊँ
तू बने नग़्मा तो मैं नग़्मा-सरा बन जाऊँ

ज़ौक़-ए-सज्दा का तक़ाज़ा है कि दर पर तेरे
इतना मिट जाऊँ कि नक़्श-ए-कफ़-ए-पा बन जाऊँ

यूँ ही देता रहे आवाज़ अगर दिल 'नश्तर'
अपनी मंज़िल का मैं ख़ुद राह-नुमा बन जाऊँ