उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir teri yaad dilate hain mujhe

फिर तेरी याद दिलाते हैं मुझे

پھر تیری یاد دلاتے ہیں مجھے

शायर: Yadgar Husain Nashtar Khairabadi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर तेरी याद दिलाते हैं मुझे
लोग दानिस्ता सताते हैं मुझे

ज़ुल्फ़-बर-दोश नशीली आँखें
ऐ वो लूटे लिए जाते हैं मुझे

मैं ने ये ख़्वाब न देखा हो कहीं
वो मोहब्बत से बुलाते हैं मुझे

उन के अश्कों में भी अब तो 'नश्तर'
दिल के टुकड़े नज़र आते हैं मुझे