उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab kuchh meri qismat ka tere dar ke qarin hai

सब कुछ मिरी क़िस्मत का तेरे दर के क़रीं है

سب کچھ مری قسمت کا تیرے در کے قریں ہے

शायर: Yadgar Husain Nashtar Khairabadi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब कुछ मिरी क़िस्मत का तेरे दर के क़रीं है
जीना भी यहीं है मुझे मरना भी यहीं है

आलम से निराला है तेरे हुस्न का आलम
तू ख़ुद भी हसीं तेरी मोहब्बत भी हसीं है

वाइज़ की ज़बाँ और ये जन्नत के फ़साने
कम्बख़्त ने मय-ख़ाना तो देखा ही नहीं है

'नश्तर' को गुनाहों की जज़ा मिल के रहेगी
उस को तिरी रहमत पे भरोसा है यक़ीं है