उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar pe ab saeban nahin pyare

सर पे अब साएबाँ नहीं प्यारे

سر پہ اب سائباں نہیں پیارے

शायर: Jahan Ara Tabassum5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर पे अब साएबाँ नहीं प्यारे
सो कहीं भी अमाँ नहीं प्यारे

कौन देता है ये सदाएँ अगर
अपना कोई वहाँ नहीं प्यारे

मंज़िल-ए-इश्क़ हो नसीब न हो
ये सफ़र राएगाँ नहीं प्यारे

न रहा ख़ुद पे ए'तिबार मुझे
तुझ से तो बद-गुमाँ नहीं प्यारे

कार-ए-दिल है सो इस लिए इस में
फ़िक्र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ नहीं प्यारे