उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind meri hai KHwab logon ke

नींद मेरी है ख़्वाब लोगों के

نیند میری ہے خواب لوگوں کے

शायर: Jahan Ara Tabassum7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद मेरी है ख़्वाब लोगों के
हैं मिरे सर अज़ाब लोगों के

मुफ़्लिसी के खंडर से ऐ मिरे दिल
चल निकालें शबाब लोगों के

गुल्सिताँ को लहू से सींचूँगी
तब खिलेंगे गुलाब लोगों के

अपनी क़िस्मत में टूटे तारे हैं
माहताब आफ़्ताब लोगों के

इक तरफ़ इल्तिफ़ात है तेरा
इक तरफ़ इज़्तिराब लोगों के

यूँही पहुँची नहीं मैं दार तलक
मैं ने उल्टे नक़ाब लोगों के

अपनी अपनी हैं दर्स-गाहें यहाँ
अपने अपने निसाब लोगों के