उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aksar jue ke khel mein haari gai hun main

अक्सर जुए के खेल में हारी गई हूँ मैं

اکثر جوے کے کھیل میں ہاری گئی ہوں میں

शायर: Jahan Ara Tabassum9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अक्सर जुए के खेल में हारी गई हूँ मैं
ग़ैरत के नाम पर भी तो मारी गई हूँ मैं

सय्याद ज़ेवरों में जकड़ता रहा मुझे
पिंजरे में डालने को सँवारी गई हूँ मैं

ना-कर्दा गुनाहों की सज़ा भोग रही हूँ
शो'लों से कई बार गुज़ारी गई हूँ मैं

क्यूँ फिर से कटहरे में बुलाया गया मुझे
क्यूँ फिर सलीब पर से उतारी गई हूँ मैं

है रूह दाग़-दार मिरे उजले जिस्म की
लहजे की मार मार के मारी गई हूँ मैं

फिर से तुम्हारी याद दिलाई गई मुझे
फिर से उसी गली से गुज़ारी गई हूँ मैं

तन्हाइयाँ तुम्हारा पता पूछने लगीं
जिस दिन से ज़िंदगी से तुम्हारी गई हूँ मैं

मैं आसमाँ पे चाँद सितारों की सफ़ में थी
तेरे लिए ज़मीं पे उतारी गई हूँ मैं

तुम ने जो मुस्कुरा के 'तबस्सुम' कहा मुझे
तुम पर तुम्हारे नाम पे वारी गई हूँ मैं