उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mera luT gaya wo baDi tauqir ke sath

दिल मिरा लूट गया वो बड़ी तौक़ीर के साथ

دل مرا لوٹ گیا وہ بڑی توقیر کے ساتھ

शायर: Jahan Ara Tabassum11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल मिरा लूट गया वो बड़ी तौक़ीर के साथ
जो मुझे जीत न पाया कभी शमशीर के साथ

कोई किस तरह से बदलेगा मुक़द्दर का लिखा
कोई किस तरह से लड़ पाएगा तक़दीर के साथ

दिल की नगरी से कई एक मुसाफ़िर गुज़रे
कोई ठहरा ही नहीं है दिल-ए-बे-पीर के साथ

दर्द जब हद से गुज़र जाए तो कुछ बात बने
नाम मेरा भी कभी आए तक़ी-'मीर' के साथ

मैं उसे भूल के भी याद नहीं आ सकती
जो मुझे बाँध गया दर्द की ज़ंजीर के साथ

मैं ने मिन्नत से और मिन्नत से तुम्हें माँगा है
तुम जो मिल सकते थे मुझ को किसी तदबीर के साथ

ये ही अल्फ़ाज़ मिरी शान हैं सरमाया हैं
कुछ तक़ाबुल नहीं इन का किसी जागीर के साथ

काट कर आज के अख़बार को ता'वीज़ किया
तेरी तस्वीर छपी है तिरी तहरीर के साथ

तुझ को राँझा से कभी भी कोई निस्बत न रही
हर फ़साने में मिरा ज़िक्र चला हीर के साथ

आप पहलू से यूँ चुप-चाप लगे बैठे हैं
जैसे तस्वीर लगा दे कोई तस्वीर के साथ

दाद मिलती है 'तबस्सुम' तुझे यूँ देर के बा'द
तेरे अशआ'र समझ आते हैं ताख़ीर के साथ