उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar pe aai jo aafat wo Tal hi gai

सर पे आई जो आफ़त वो टल ही गई

سر پہ آئی جو آفت وہ ٹل ہی گئی

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर पे आई जो आफ़त वो टल ही गई
ज़िंदगी रंज-ओ-ग़म से निकल ही गई

लाख मोहतात थे दीदा-ओ-दिल से हम
फिर भी उन की नज़र चाल चल ही गई

उम्र भर हम रहे ग़म से दामन-कशाँ
ज़िंदगी आप के ग़म में ढल ही गई

राज़ रक्खा मोहब्बत के हर राज़ को
फिर भी ये बात मुँह से निकल ही गई

चारासाज़ों के अल्ताफ़ का शुक्रिया
ज़िंदगी ग़म के ग़ुंचों में ढल ही गई

आप ने लाख उस को न चाहा मगर
अंजुमन में मिरी बात चल ही गई

लाखों हम ने किया ज़ब्त-ए-दिल पर मगर
उन को देखा तबीअत मचल ही गई

जब भी 'आसी' मुझे वो मिले राह में
देख कर हम को ये दुनिया जल ही गई