उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samundaron mein bhi sahra dikhai deta hai

समुंदरों में भी सहरा दिखाई देता है

سمندروں میں بھی صحرا دکھائی دیتا ہے

शायर: Umair Samar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

समुंदरों में भी सहरा दिखाई देता है
मिरी नज़र को ये क्या क्या दिखाई देता है

जुनून इस को हक़ीक़त बना के मानेगा
जो 'मेरी आँख में सपना दिखाई देता है

न जाने कौन से चश्मे से देखता है उसे
हर एक चेहरे पे धब्बा दिखाई देता है

तुम उस को देखने जाओ तो ग़ौर ये करना
बिछड़ के मुझ से वो कैसा दिखाई देता है

'समर' ये कौन सी दुनिया में आ गया हूँ मैं
हर एक शख़्स अकेला दिखाई देता है