उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samundar ulTa-sidha bolta hai

समुंदर उल्टा-सीधा बोलता है

سمندر الٹا سیدھا بولتا ہے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

समुंदर उल्टा-सीधा बोलता है
सलीक़े से तो प्यासा बोलता है

यहाँ तो उस का पैसा बोलता है
वहाँ देखेंगे वो क्या बोलता है

निगाहें करती रह जाती हैं हिज्जे
वो जब चेहरे से इमला बोलता है

मैं चुप रहता हूँ इतना बोल कर भी
वो चुप रह कर भी कितना बोलता है

तुम्हारे साथ उड़ानें बोलती हैं
हमारे साथ पिंजरा बोलता है

ये महफ़िल ख़त्म हो जाए तो देखूँ
बिना माइक के वो क्या बोलता है

किसी के लब नहीं हैं उस के जैसे
वो हर महफ़िल में तन्हा बोलता है

मिरी हद्द-ए-अदब ताईद तक है
ख़ुदा जाने वो क्या-क्या बोलता है