उर्दू शायरी · ग़ज़ल

salam aaya na kuchh paigham aaya

सलाम आया न कुछ पैग़ाम आया

سلام آیا نہ کچھ پیغام آیا

शायर: Zaheen Shah Taji9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सलाम आया न कुछ पैग़ाम आया
तग़ाफ़ुल उन का मेरे काम आया

वो हैं अपने न होने से नुमायाँ
निगाहों पर नया इल्ज़ाम आया

मसल मशहूर है ये मय-कदे में
हुआ पुख़्ता यहाँ जो ख़ाम आया

हकीम-ए-'अस्र को मस्ती में आ कर
इलाज-ए-गर्दिश-ए-अय्याम' आया

शब-ए-ग़म दिल को तड़पाने ही आए
तुम आए या तुम्हारा नाम आया

मोहब्बत वक़्त पर हाकिम है फिर भी
तसव्वुर उन का सुब्ह-ओ-शाम आया

दर-ए-पीर-ए-मुग़ाँ पर है ये कतबा
गया ख़ुश-काम जो नाकाम आया

जो देखा मह्द से ले कर लहद तक
गईं बेचैनियाँ आराम आया

'ज़हीं' पैराहन-ए-यूसुफ़ समझ कर
ग़िलाफ़-ए-का'बा को मैं थाम आया