उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sajal ki shor zaminon mein aashiyana kare

सजल कि शोर ज़मीनों में आशियाना करे

سجل کہ شور زمینوں میں آشیانہ کرے

शायर: Iftikhar Arif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सजल कि शोर ज़मीनों में आशियाना करे
न जाने अब के मुसाफ़िर कहाँ ठिकाना करे

बस एक बार उसे पढ़ सकूँ ग़ज़ल की तरह
फिर उस के बाद तो जो गर्दिश-ए-ज़माना करे

हवाएँ वो हैं कि हर ज़ुल्फ़ पेचदार हुई
किसे दिमाग़ कि अब आरज़ू-ए-शाना करे

अभी तो रात के सब निगह-दार जागते हैं
अभी से कौन चराग़ों की लौ निशाना करे

सुलूक में भी वही तज़्किरे वही तशहीर
कभी तो कोई इक एहसान ग़ाएबाना करे

मैं सब को भूल गया ज़ख़्म-ए-मुंदमिल की मिसाल
मगर वो शख़्स कि हर बात जारेहाना करे