उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab bhi tauhin-e-itaat nahin hogi humse

अब भी तौहीन-ए-इताअत नहीं होगी हम से

اب بھی توہین اطاعت نہیں ہوگی ہم سے

शायर: Iftikhar Arif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब भी तौहीन-ए-इताअत नहीं होगी हम से
दिल नहीं होगा तो बैअ'त नहीं होगी हम से

रोज़ इक ताज़ा क़सीदा नई तश्बीब के साथ
रिज़्क़ बर-हक़ है ये ख़िदमत नहीं होगी हम से

दिल के माबूद जबीनों के ख़ुदाई से अलग
ऐसे आलम में इबादत नहीं होगी हम से

उजरत-ए-इश्क़ वफ़ा है तो हम ऐसे मज़दूर
कुछ भी कर लेंगे ये मेहनत नहीं होगी हम से

हर नई नस्ल को इक ताज़ा मदीने की तलाश
साहिबो अब कोई हिजरत नहीं होगी हम से

सुख़न-आराई की सूरत तो निकल सकती है
पर ये चक्की की मशक़्क़त नहीं होगी हम से