उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sainkaDon gham ki saughat de kar mujhe

सैंकड़ों ग़म की सौग़ात दे कर मुझे

سینکڑوں غم کی سوغات دے کر مجھے (ردیف .. ن)

शायर: Ved Prakash Malik Sarshar10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सैंकड़ों ग़म की सौग़ात दे कर मुझे
फिर ये कहते हैं हम ने दिया कुछ नहीं

और भी कुछ बचा हो तो दे दो हमें
ताकि ये कह सको के बचा कुछ नहीं

तुम गिरा दो नज़र से किसी को अगर
इस से बढ़ कर तो उस की सज़ा कुछ नहीं

कर तो लूँ ज़िंदगी में मोहब्बत सनम
पर मोहब्बत में ग़म के सिवा कुछ नहीं

चल के थक जाइए थक के मर जाइए
ये वो मंज़िल है जिस का पता कुछ नहीं

क्या हुआ है बता क्यों है मुझ से ख़फ़ा
मैं ने अब तक तो तुझ से कहा कुछ नहीं

एक तेरी मोहब्बत का था आसरा
अब मिरी ज़िंदगी में रहा कुछ नहीं

थी ये हसरत की उन से मिला दीजिए
हम को मिल के भी उन से मिला कुछ नहीं

कर दिया है मुझे उस ने बर्बाद यूँ
कि गया कुछ नहीं और रहा कुछ नहीं

यूँ बनाने को सब कुछ बनाया गया
पर मगर उस से अपना बना कुछ नहीं