उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jalwe ko parda parde ko jalwa bana diya

जल्वे को पर्दा पर्दे को जल्वा बना दिया

جلوے کو پردا پردے کو جلوہ بنا دیا

शायर: Ved Prakash Malik Sarshar10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जल्वे को पर्दा पर्दे को जल्वा बना दिया
अहल-ए-नज़र को तुम ने तमाशा बना दिया

ज़र्रे को महर क़तरे को दरिया बना दिया
तेरी नज़र ने क्या से हमें क्या बना दिया

हक़ ने तुम्हें बड़ा हमें छोटा बना दिया
जो कुछ बना दिया बहुत अच्छा बना दिया

क्या पूछते हो हम ने तुम्हें क्या बना दिया
रूह-ए-हयात जान-ए-तमन्ना बना दिया

सरमस्ती-ए-बहार का 'आलम न पूछिए
हर गुल कि उस ने साग़र-ओ-सहबा बना दिया

दुनिया हमारे वास्ते दोज़ख़ से कम न थी
दुनिया को तेरे इश्क़ ने दुनिया बना दिया

इस दिल का हाल पूछ रहे हैं वो बार-बार
जिस दिल को बे-नियाज़-ए-तमन्ना बना दिया

देखें लहू से भरता है अब इस में रंग कौन
हम ने नई बहार का नक़्शा बना दिया

जब कोई आँख तेरा नज़ारा न कर सकी
जैसा किसी के ज़ेहन में आया बना दिया

'सरशार' उन के ग़म का ये एहसाँ भी ख़ूब है
दुनिया को ग़म-गुसार हमारा बना दिया