उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh mile ya na mile milte milate rahiye

कुछ मिले या न मिले मिलते मिलाते रहिए

کچھ ملے یا نہ ملے ملتے ملاتے رہیے

शायर: Ved Prakash Malik Sarshar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ मिले या न मिले मिलते मिलाते रहिए
शौक़ अच्छा है इसे ख़ूब बढ़ाते रहिए

दोस्त गर काम न आए तो कोई बात नहीं
उन को इस बात का एहसास कराते रहिए

आप के आने से लोगों को जलन होती है
है ये दुनिया का चलन आप तो आते रहिए

मुझ पे एहसान करें आप गुज़ारिश है मिरी
मुझ को हर रोज़ इसी तरह सताते रहिए

मेरे रोने पे कई शख़्स हँसा करते हैं
हो सके आप से तो मुझ को रुलाते रहिए