उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sahar na hath lagi sau sitare chhu aae

सहर न हाथ लगी सौ सितारे छू आए

سحر نہ ہاتھ لگی سو ستارے چھو آئے

शायर: Vijay Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सहर न हाथ लगी सौ सितारे छू आए
दुआ करो हमें आदाब-ए-जुस्तजू आए

अजीब रौशनी दर आई है दरीचे से
पुराने ज़ख़्म से यक-लख़्त ज्यूँ लहू आए

बताओ गोर-कनो! एक घर बना दोगे?
कि जिस में ख़्वाब न चेहरा न आरज़ू आए

वो तारा टूटा इधर मेल लिख रहा हूँ तुझे
प तेरा नाम न चेहरा न याद तू आए

चटख़ के टूटना आदत हुई है चेहरे की
और उस पे शौक़ कि आईना रू-ब-रू आए