उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saDak ki bhiD mein jo kho gaya hai

सड़क की भीड़ में जो खो गया है

سڑک کی بھیڑ میں جو کھو گیا ہے

शायर: Lutf-ur-rahman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सड़क की भीड़ में जो खो गया है
वो तन्हा शख़्स अब तन्हा हुआ है

किरन के हाथ में नेज़ा है जब से
मिरा साया बहुत घबरा रहा है

फ़सील-ए-जिस्म से आगे का रस्ता
धुएँ के बादलों में खो गया है

मिरे सीने के इस अंधे कुएँ में
न जाने किस लिए वो झाँकता है

उसे आईना दिखलाओगे कैसे
वो आदम-ज़ाद हम सब का ख़ुदा है

जबीन-ए-शाख़ पर किस बे-कसी से
लहू ख़ुर्शीद का फैला हुआ है

सजा है जब से शोहरत की दुकाँ में
वो पत्थर तब से हीरा बन गया है