उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko kuchh yaad nahin tere siwa bhul gae

हम को कुछ याद नहीं तेरे सिवा भूल गए

ہم کو کچھ یاد نہیں تیرے سوا بھول گئے

शायर: Lutf-ur-rahman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को कुछ याद नहीं तेरे सिवा भूल गए
अपनी सूरत ही नहीं अपनी सदा भूल गए

कूचा-ए-चश्म के सब नक़्श ओ नवा भूल गए
हम पे वो वक़्त पड़ा शोर-ए-अना भूल गए

मैं अकेला ही रहा बर्ग-ओ-समर से ख़ाली
मौसम-ए-गुल में मुझे मेरे ख़ुदा भूल गए

मौत और हिज्र-ए-मुसलसल में कोई फ़र्क़ नहीं
तू तो फिर तू है हम अपनी वफ़ा भूल गए

अब के यूँ राख हुआ मंज़र-ए-आहू-चश्माँ
दश्त ऐ दश्त तिरी पिछली हवा भूल गए

इतना बिखरा हुआ लहजा यहाँ 'लुत्फ़-उर-रहमान'
आप भी अपनी वो कुछ तर्ज़-ए-अदा भूल गए