उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ibarat se waraq aari rahega

इबारत से वरक़ आरी रहेगा

عبارت سے ورق عاری رہے گا

शायर: Lutf-ur-rahman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इबारत से वरक़ आरी रहेगा
मगर लिखना मिरा जारी रहेगा

अज़ल की सुब्ह से शाम-ए-अबद तक
नशा मुझ पे तो ये तारी रहेगा

ख़ुदाई है तो है कोई ख़ुदा भी
न हो शाइ'र तो कब क़ारी रहेगा

जो नाज़-ए-कज-कुलाही से है ग़ाफ़िल
वही फ़नकार दरबारी रहेगा

मोहब्बत करने वालों का जहाँ से
अजब इक रिश्ता-ए-ख़्वारी रहेगा

बंधी है जिस के सर दस्तार-ए-शाही
वो सूफ़ी जिंस बाज़ारी रहेगा