उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut maza tha uDan mein bhi

बहुत मज़ा था उड़ान में भी

بہت مزا تھا اڑان میں بھی

शायर: Lutf-ur-rahman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत मज़ा था उड़ान में भी
यक़ीं था रौशन गुमान में भी

हसीन शब पर है चाँद मेरा
दिया जला आसमान में भी

वही अकेला है अंजुमन में
वही है तन्हा मकान में भी

चटान में भी रवाँ है दरिया
छुपा है दरिया चटान में भी

हुए थे बाज़ू भी शल हमारे
हवा न थी बादबान में भी

वही था आग़ाज़-ओ-इंतिहा भी
वही रहा दरमियान में भी

चढ़ा न था तीर भी नज़र का
लचक न थी कुछ कमान में भी