उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sada rahegi yahi rawani rawan hai pani

सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी

سدا رہے گی یہی روانی رواں ہے پانی

शायर: श्रेय पुष्ट नहीं9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी
बहाओ इस का है जावेदानी रवाँ है पानी

बहाव में बह रहे हैं मौसम निगाह मंज़र
बहाए जाता है सब को पानी रवाँ है पानी

कभी थे इन रास्तों में क़र्ये मकान चेहरे
ये दास्ताँ है मगर पुरानी रवाँ है पानी

न अब वो साहिल न अब वो हस्ती न वो फ़सीलें
न उस ज़मीं की कोई निशानी रवाँ है पानी

वहाँ वो अक़्लीम जिस पे सिक्का रवाँ था अपना
यहाँ हवाओं की हुक्मरानी रवाँ है पानी

वो रात दिन भी इसी रवानी में बह चुके हैं
बिखर चुकीं वो रुतें सुहानी रवाँ है पानी

यहाँ मैं दोहरा रहा हूँ पहले सफ़र की बातें
मगर कहाँ अब वो शादमानी रवाँ है पानी

ये अश्क धुँदला रहे हैं पैहम मिटा रहे हैं
निगाह में याद की कहानी रवाँ है पानी

वो महफ़िलें हैं न अब वो साथी रहे हैं बाक़ी
न अब वो बचपन न वो जवानी रवाँ है पानी