उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fasl-e-gul hai saja hai mai-KHana

फ़स्ल-ए-गुल है सजा है मय-ख़ाना

فصل گل ہے سجا ہے مے خانہ

शायर: श्रेय पुष्ट नहीं6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़स्ल-ए-गुल है सजा है मय-ख़ाना
चल मिरे दिल खुला है मय-ख़ाना

शाम के वक़्त बैठने के लिए
सब से अच्छी जगह है मय-ख़ाना

ख़त है शायद किसी शराबी का
ख़त के ऊपर लिखा है मय-ख़ाना

किस तरह छोड़ दूँ इसे वाइज़
मुश्किलों से मिला है मय-ख़ाना

ज़िंदगी जब गुज़ारनी है कहीं
यार फिर क्या बुरा है मय-ख़ाना

जब से वो आँख है ख़फ़ा हम से
यूँ लगे है ख़फ़ा है मय-ख़ाना