उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahna ghalat ghalat to chhupana sahi sahi

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही

کہنا غلط غلط تو چھپانا سہی سہی

शायर: श्रेय पुष्ट नहीं6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही
क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही

ये सुब्ह सुब्ह चेहरे की रंगत उड़ी हुई
कल रात तुम कहाँ थे बताना सही सही

दिल ले के मेरा हाथ में कहते हैं मुझ से वो
क्या लोगे इस का दाम बताना सही सही

आँखें मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम-ए-मय
साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही सही

ऐ मय-फ़रोश भीड़ है तेरी दुकान पर
गाहक हैं हम भी माल दिखाना सही सही

'साजिद' तो जान-ओ-दिल से फ़क़त आप का है बस
क्या आप भी हैं उस के बताना सही सही