उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sada-e-kun hui yaksar wujud mein aaya

सदा-ए-कुन हुइ यकसर वुजूद में आया

صدائے کن ہوئی یکسر وجود میں آیا

शायर: Faisal Saghar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सदा-ए-कुन हुइ यकसर वुजूद में आया
मैं भर चुका तो समंदर वुजूद में आया

और इस से पहले यहाँ कुछ नहीं था कुछ भी नहीं
ये मेरे देखते मंज़र वुजूद में आया

ख़ुदा को शक्ल की हसरत हुई थी जिस लम्हे
सुना है तब मिरा पैकर वुजूद में आया

उसे बताया था मैं ने मैं रंग लाता नहीं
वो जानते हुए बंजर वुजूद में आया

ये लोग जिस का तसव्वुर भी कर नहीं सकते
वो मेरे वास्ते अक्सर वुजूद में आया

वो टूट-फूट किसी काम आ गई 'फ़ैसल'
मैं पहले से कहीं बेहतर वुजूद में आया