उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe apne hi andar chor sa mahsus hota hai

मुझे अपने ही अंदर चोर सा महसूस होता है

مجھے اپنے ہی اندر چور سا محسوس ہوتا ہے

शायर: Faisal Saghar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे अपने ही अंदर चोर सा महसूस होता है
तुझे देखूँ तो कोई देखता महसूस होता है

तहय्युर का ये 'आलम है कि जिस को देख कर गुज़रें
पलट के देखिए तो दूसरा महसूस होता है

मैं अंदर से बहुत ख़ाली हूँ लेकिन तुम भी सच्चे हो
कि मेरा जिस्म बाहर से भरा महसूस होता है

मिरे अंदर किसी शय ने बहुत हलचल मचाई है
जहाँ भी बैठता हूँ ज़लज़ला महसूस होता है

मगर इक 'उम्र लगती है यहाँ तक आने में साहिब
जहाँ नुक़्सान में भी फ़ाएदा महसूस होता है

न जाने 'इश्क़ की अब कौन सी मंज़िल पे फ़ाएज़ हूँ
जहाँ मैं हूँ वहाँ 'फ़ैसल' ख़ुदा महसूस होता है