उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main giran-bar tha is waste kam-maya tha

मैं गिराँ-बार था इस वास्ते कम-माया था

میں گراں بار تھا اس واسطے کم مایہ تھا

शायर: Faisal Saghar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं गिराँ-बार था इस वास्ते कम-माया था
तुझ को क्यों रौंदा गया तू तो फ़क़त साया था

कल खुला कितने दिनों बा'द ये दरवाज़ा-ए-दिल
कल कोई कितने दिनों बा'द यहाँ आया था

बार बार उठती थीं आँखें मिरी ख़ंजर की तरफ़
कितनी मुश्किल से मैं शब ख़ुद को बचा पाया था

फिर मिरे हाथ में इक रौशनी दर आई थी
मैं ने कुछ देर किसी हाथ को सहलाया था

फिर मिरी बात सुनी अन-सुनी करने लगे लोग
मैं ने इक रोज़ किसी बात को दोहराया था

कल मिरे कमरे में महकार थी 'फ़ैसल' क्या क्या
कल मिरे कमरे में फूलों का ख़ुदा आया था