उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ise bhi rasm ka hissa bataya jata hai

इसे भी रस्म का हिस्सा बताया जाता है

اسے بھی رسم کا حصہ بتایا جاتا ہے

शायर: Faisal Saghar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इसे भी रस्म का हिस्सा बताया जाता है
हमें घसीट के बाज़ार लाया जाता है

तो क्या ब'ईद कि हम सुर्ख़-रू भी हो जाएँ
हमारा ज़र्फ़ अगर आज़माया जाता है

गुज़िश्ता 'अह्द में हम शहर से निकाले गए
न-जाने अब के हमें क्या सुनाया जाता है

अब ऐसे हाल में क्या क़हक़हों की फ़रमाइश
यही बहुत है अगर मुस्कुराया जाता है

तुम्हें तो लोरियाँ शायद सुनाई जाती हों
हमें तो थपकियाँ दे कर सुलाया जाता है

इसी लिए तो मुझे रौशनी पसंद नहीं
जहाँ भी जाऊँ मिरे साथ साया जाता है