उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sach chhupati rahi hawa yani

सच छुपाती रही हवा या'नी

سچ چھپاتی رہی ہوا یعنی

शायर: Charagh Barelvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सच छुपाती रही हवा या'नी
दश्त का हाल और था या'नी

बंदिशें रूह-ओ-जिस्म पर ख़ुश हों
क़ैद में भी है इक मज़ा या'नी

गर ख़ुदा बन नहीं है कुछ भी यहाँ
है ख़ुदा का भी इक ख़ुदा या'नी

लोरियाँ सुबकियों में बदली हैं
कोई सच-मुच में सो गया या'नी

इश्क़ की रूह काँप उट्ठी है
जिस्म ने जिस्म छू लिया या'नी