उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-sabab chaak par dhare the hum

बे-सबब चाक पर धरे थे हम

بے سبب چاک پر دھرے تھے ہم

शायर: Charagh Barelvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-सबब चाक पर धरे थे हम
बनते बनते भी क्या बने थे हम

ज़ब्त-ए-ग़म हार ही गया आख़िर
उस को देखा तो रो पड़े थे हम

तुझ को काँटे कहाँ से लग जाते
आगे आगे जो चल रहे थे हम

हादिसा किस तरफ़ को ले आया
घर से क्या सोच कर चले थे हम

सच बता ख़ालिक़-ए-जहान-ए-ख़राब
इस तमाशे को ही बने थे हम

हो गई शाम तब मिली दुनिया
सारा दिन ढूँडते फिरे थे हम