उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Dubte waqt jo kuchh hath mein gauhar aae

डूबते वक़्त जो कुछ हाथ में गौहर आए

ڈوبتے وقت جو کچھ ہاتھ میں گوہر آئے

शायर: Charagh Barelvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

डूबते वक़्त जो कुछ हाथ में गौहर आए
सब के सब नाख़ुदा के हाथ में हम धर आए

जंग लड़ने गए हम जो सहर-ए-दुनिया से
शाम को घर कई हिस्सों में बिखर कर आए

उस की आँखों को तमाशे की तमन्ना है बहुत
उस से कहना कि किसी रात मिरे घर आए

हाए उस नक़्ल-ए-मकानी ने किया है बर्बाद
जितने बसने को गए उतने उजड़ कर आए