उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sach batana ki mere bin jaanan

सच बताना कि मेरे बिन जानाँ

سچ بتانا کہ میرے بن جاناں

शायर: Aamir Ata6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सच बताना कि मेरे बिन जानाँ
कैसे कटते हैं तेरे दिन जानाँ

किस के बाज़ू पे अब चुभाओगी
अपने इस्कार्फ़ का वो पिन जानाँ

'इश्क़ के इम्तिहाँ से गुज़रूँगा
पर्चे हों जिस क़दर कठिन जानाँ

हुक्म पर हुक्म ना-मुनासिब है
तेरा 'आशिक़ नहीं है जिन जानाँ

तिल की ता'दाद जाननी है तुझे
मूँद ले आँख बोसे गिन जानाँ

हाथ जब थाम ही लिए उस के
फिर ये बिस्तर पे कैसा घिन जानाँ