उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh to an-paDh hai aur nadan hai

आँख तो अन-पढ़ है और नादान है

آنکھ تو ان پڑھ ہے اور نادان ہے

शायर: Aamir Ata9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख तो अन-पढ़ है और नादान है
दिल की ख़्वाहिश एक ही इंसान है

इस लिए सब आगे पीछे हैं मिरे
तुझ से जो थोड़ी बहुत पहचान है

हम खड़े हैं दिल हथेली पर लिए
हुस्न वालों पर ही उस का ध्यान है

तेरे क़दमों की ज़ियाफ़त के लिए
मैं ने चौखट पर रखा गुलदान है

पास इक गज़ भी ख़ुशी का है नहीं
और ग़म का पूरा पूरा थान है

हुक्म रब का जब तलक होता नहीं
ज़िंदगी की मौत ख़ुद निगरान है

क्या मिली शोहरत कि सब मिलने लगे
वो भी जिन से दूर की पहचान है

दिल में है हिर्स-ओ-हवस की बू भरी
और फूलों से सजा दालान है

ग़म भी इतरा कर ख़ुशी से कह उठा
ये 'अता' तो रोज़ का मेहमान है