उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ba-nam-e-‘ishq dil toDa gaya hai

ब-नाम-ए-‘इश्क़ दिल तोड़ा गया है

بنام عشق دل توڑا گیا ہے

शायर: Aamir Ata12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ब-नाम-ए-‘इश्क़ दिल तोड़ा गया है
बना कर फिर मुझे ढाया गया है

निसाब-ए-‘इश्क़ में शामिल नहीं था
सबक़ जो तू मुझे सिखला गया है

हमें तो वस्ल में भी चैन कब था
तुम्हें तो हिज्र भी रास आ गया है

जुनूँ भी फ़ल्सफ़ा है 'आशिक़ी का
मुझे इक ना-समझ समझा गया है

बड़ी मुश्किल से जचती है कोई शय
ख़ुदा का शुक्र है तू भा गया है

मैं था सुलझा हुआ मा'सूम लड़का
लगा कर वो गले उलझा गया है

मैं उस को बेवफ़ा मानूँ तो कैसे
नमाज़-ए-शब में जो माँगा गया है

मुसाफ़िर-ख़ाना है शायद मिरा दिल
वो अपने तौर पर आया गया है

वहीं पे मुंतज़िर हूँ मुद्दतों से
मुझे वो जिस जगह ठहरा गया है

तुम उस के ग़म का अंदाज़ा लगाओ
नदी की सम्त जो तन्हा गया है

उसे सौग़ात में दे आया हस्ती
ये जिस दीवाने का लाशा गया है

मैं इस को सारा पी जाऊँगा इक दिन
कई कश्ती को दरिया खा गया है