उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabz mausam ki KHabar le ke hawa aai ho

सब्ज़ मौसम की ख़बर ले के हवा आई हो

سبز موسم کی خبر لے کے ہوا آئی ہو

शायर: Parveen Shakir8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब्ज़ मौसम की ख़बर ले के हवा आई हो
काम पतझड़ के असीरों की दु'आ आई हो

लौट आई हो वो शब जिस के गुज़र जाने पर
घाट से पायलें बजने की सदा आई हो

इसी उम्मीद में हर मौज-ए-हवा को चूमा
छू के शायद मिरे प्यारों की क़बा आई हो

गीत जितने लिखे उन के लिए ऐ मौज-ए-सबा
दिल यही चाहा कि तो उन को सुना आई हो

आहटें सिर्फ़ हवाओं की ही दस्तक न बनें
अब तो दरवाज़ों पे मानूस सदा आई हो

यूँ सर-ए-'आम खुले सर मैं कहाँ तक बैठूँ
किसी जानिब से तो अब मेरी रिदा आई हो

जब भी बरसात के दिन आए यही जी चाहा
धूप के शह्र में भी घिर के घटा आई हो

तेरे तोहफ़े तो सब अच्छे हैं मगर मौज-ए-बहार
अब के मेरे लिए ख़ुशबू-ए-हिना आई हो