उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabhi sadiyon ko mil kar sochna hai

सभी सदियों को मिल कर सोचना है

سبھی صدیوں کو مل کر سوچنا ہے

शायर: Chandra Shekhar Varma8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सभी सदियों को मिल कर सोचना है
कि इक लम्हे का मन क्यों अनमना है

तुम्हारे पास हैं इल्म-ओ-हुनर सब
हमारे पास बस इक बचपना है

बचा कर तुम उसे गुल्लक में रक्खो
हमें तो ज़िंदगी को ख़र्चना है

हैं कुछ ईमान तेरे खेल में या
तिरा मक़्सद यहाँ बस जीतना है

सिवा इस के क़यामत और क्या है
ख़ुदाई का ख़ुदा से सामना है

ज़रा ये सोच कर तक़रीर करना
तुम्हारे बाद हम को बोलना है

चमक सूरज की कम थोड़े हुई है
उसे घेरे हुए बादल घना है

किसी दिन भाड़ को वो फोड़ देगा
जिसे कहते हैं सब थोथा चना है