उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabhi ke kaam par uski nazar hai

सभी के काम पर उस की नज़र है

سبھی کے کام پر اس کی نظر ہے

शायर: Onkar Singh Vivek7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सभी के काम पर उस की नज़र है
मगर इंसान फिर भी बे-ख़बर है

जुदा पत्ते हुए जाते हैं सारे
ये कैसा वक़्त आया शाख़ पर है

खटकता है वो कोठी की नज़र में
बग़ल में एक जो छप्पर का घर है

सर-ए-बाज़ार ईमाँ बिक रहे हैं
यही बस आज की ताज़ा ख़बर है

यक़ीं जल्दी ही कर लेते हो सब पर
कहीं धोका न खाओ इस का डर है

कहाँ आसानियाँ ढूँढो हो इस में
मियाँ ये ज़िंदगानी का सफ़र है

कहानी में है जिस ने जान डाली
वही किरदार बे-हद मुख़्तसर है