उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aajizi to hai nahin guftar mein

'आजिज़ी तो है नहीं गुफ़्तार में

عاجزی تو ہے نہیں گفتار میں

शायर: Onkar Singh Vivek7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'आजिज़ी तो है नहीं गुफ़्तार में
कौन पूछेगा हमें दरबार में

नफ़सियाती नुक़्स है दो-चार में
वर्ना है सब का ‘अक़ीदा प्यार में

संग रखता है उसे जो ये गुलाब
कुछ तो देखा होगा आख़िर ख़ार में

बारहा रोता है दिल ये सोच कर
बन कटेगा शहर के विस्तार में

पूछने आए थे मेरी ख़ैरियत
दे गए ग़म और वो उपहार में

'मीर' 'ग़ालिब' 'ज़ौक़' सब का शुक्रिया
रंग क्या क्या भर गए अश'आर में

बैठा है परदेस में लख़्त-ए-जिगर
क्या ख़ुशी माँ को मिले त्यौहार में