उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghuggiyon ka haq dabana aa gaya

झुग्गियों का हक़ दबाना आ गया

جھگیوں کا حق دبانا آ گیا

शायर: Onkar Singh Vivek8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

झुग्गियों का हक़ दबाना आ गया
कोठियों को ज़ुल्म ढाना आ गया

कह रही है मुस्कुराहट खेत की
धान की बाली में दाना आ गया

दूधिया ख़ुश है कि बेटे को भी अब
दूध में पानी मिलाना आ गया

फ़िक्र कुछ तो कम हुई माँ-बाप की
लाल को खाना-कमाना आ गया

वो सभी रौनक़ हुए दरबार की
हाँ में जिन को सर हिलाना आ गया

साँस की बीमारियाँ बढ़ने लगीं
गाँव में क्या कार-ख़ाना आ गया

छू ही लेंगे आसमाँ को एक दिन
पाँव धरती पर जमाना आ गया

करते करते मश्क़ मिसरे पर 'विवेक'
हम को भी मिसरा' लगाना आ गया