उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh miTha kuchh khaara-pan hai

कुछ मीठा कुछ खारा-पन है

کچھ میٹھا کچھ کھارا پن ہے

शायर: Onkar Singh Vivek7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ मीठा कुछ खारा-पन है
क्या क्या स्वाद लिए जीवन है

कैसे आँख मिला कर बोले
साफ़ नहीं जब इस का मन है

शिकवे भी उन से ही होंगे
जिन से थोड़ा अपना-पन है

धन ही धन है इक तबक़े पर
इक तबक़ा बेहद निर्धन है

सूखा है तो बाढ़ कहीं पर
बरसा ये कैसा सावन है

कल निश्चित ही काम बनेंगे
आज भले ही कुछ अड़चन है

दिल का है वो साफ़ भले ही
लहजे में कुछ कड़वा-पन है