उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kash aisa dayar aa jae

काश ऐसा दयार आ जाए

کاش ایسا دیار آ جائے

शायर: Onkar Singh Vivek7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काश ऐसा दयार आ जाए
गुलशनों की क़तार आ जाए

क्या मज़ा कश्तियाँ चलाने का
जब नदी में उतार आ जाए

अब ये मज़लूम जाग उठ्ठे हैं
होश में ताजदार आ जाए

मश्क़ से जी चुरा के ये ख़्वाहिश
शा'इरी में निखार आ जाए

ख़्वाब में भी अगर दिखे पानी
प्यास को कुछ क़रार आ जाए

जीतने का जुनूँ न कम होगा
लाख हिस्से में हार आ जाए

आप जैसे बड़ों की महफ़िल में
क्या भला ख़ाकसार आ जाए