उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabaq kitab ka pakka nahin kiya maine

सबक़ किताब का पक्का नहीं किया मैं ने

سبق کتاب کا پکا نہیں کیا میں نے

शायर: Sabir Aafaque7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सबक़ किताब का पक्का नहीं किया मैं ने
अभी समझना है जीवन का फ़ल्सफ़ा मैं ने

बुझाई प्यास नहीं बस नहा लिया मैं ने
लिया है काम समुंदर से दूसरा मैं ने

भला वो आँखों से ग़म का पता लगाएगा क्या
पहन लिया है ये चश्मा जो धूप का मैं ने

हुआ है ग़ैर क़बीले की इक हसीं से इश्क़
अभी तो करना है मुश्किल का सामना मैं ने

किसी मज़ार पे मिन्नत से उस को पाया है
कि एक धागे से खींचा है दायरा मैं ने

मिसालें देते थे उस्ताद मैं समझता न था
फिर उस के कहने से समझा था ज़ाविया मैं ने

निशस्त है नहीं कह कर कई बसें छोड़ीं
तुझे बचाने में कितनों को खो दिया मैं ने