उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni gagar se mat nikal mujhe

अपनी गागर से मत निकाल मुझे

اپنی گاگر سے مت نکال مجھے

शायर: Sabir Aafaque7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी गागर से मत निकाल मुझे
इस समुंदर से मत निकाल मुझे

दिल के अंदर क़ियाम है मेरा
सिर्फ़ बाहर से मत निकाल मुझे

प्यार करती है मुझ से हीरोइन
यार पिक्चर से मत निकाल मुझे

ग़म का मोती हूँ दिल में रहता हूँ
गहरे सागर से मत निकाल मुझे

मैं तिरे काम की ख़बर हूँ मगर
न्यूज़ पेपर से मत निकाल मुझे

कोई गोली नहीं हूँ काँटा हूँ
नोक-ए-ख़ंजर से मत निकाल मुझे

झोंपड़ी नहर पेड़ और पंछी
ऐसे मंज़र से मत निकाल मुझे