उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phal hai gar tu to main patthar hun teri qismat hai

फल है गर तू तो मैं पत्थर हूँ तिरी क़िस्मत है

پھل ہے گر تو تو میں پتھر ہوں تری قسمت ہے

शायर: Sabir Aafaque7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फल है गर तू तो मैं पत्थर हूँ तिरी क़िस्मत है
मैं अगर तेरा मुक़द्दर हूँ तिरी क़िस्मत है

कुछ ग़लत लिख भी लिया है तो मिटा ले उस को
मैं तिरे हाथ में डस्टर हूँ तिरी क़िस्मत है

जान को जान ग़नीमत तो इबादत कर ले
जान हूँ जिस्म के अंदर हूँ तिरी क़िस्मत है

बर्फ़ रातों में ठिठुरने से तो अच्छा ये है
ओढ़ ले मुझ को मैं चादर हूँ तिरी क़िस्मत है

तू है प्यासा तो कोई फ़िक्र न कर यार मिरे
शुक्र कर मैं भी समुंदर हूँ तिरी क़िस्मत है

मुझ से हो कर तो निकल आ ज़रा दुनिया तो देख
चार दीवारी में मैं दर हूँ तिरी क़िस्मत है

पूछ उस शख़्स से मैं जिस को नहीं मिल पाया
मैं तुझे जितना मयस्सर हूँ तिरी क़िस्मत है